आशा का दूसरा नाम है त्रिजटा
मनुष्य जीवन सुखों और दुखों का मिलाजुला सामुच्य है। जीवन में सुख हैं तो दुख भी हैं। ऐसा कोई भी नहीं जिसके जीवन में केवल सुख ही लिखे हों। विपत्ति हर किसी पर आती है। लेकिन विपत्ति की घड़ी का इंसान ने किस तरह सामना किया ये देखने की बात है। वैसे तो रामायण साफ कहती है कि 'धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परखिए चारी।।' लेकिन रामायण ये भी बताती है कि विपत्ति काल में ईश्वर आपको अकेला नहीं छोड़ता, कोई न कोई कारण आपके साथ ऐसा जोड़ देता है जो आपकी उम्मीद जगाए रखता है। जरूरत है तो बस ईश्वर के उस संकेत को समझने की। माता सीता का पूरा जीवन विपत्तियों से भरा रहा। इनमें सबसे बड़ी विपत्ति थी रावण द्वारा सीता का अपहरण। सीता जैसी पतिव्रता स्त्री के लिए राक्षस नगरी लंका में एक पल काटना भी मुश्किल था। लेकिन फिर भी उन्होंने श्री राम के इंतजार में वहां समय बिताया। आखिर कैसे। जिस स्त्री का पति के वियोग में एक पल भी जीना मुश्किल हो उसके लिए इतना समय बिताना कैसे संभव हो गया। अगर थोड़ा सा ध्यान दें तो हमें इसका जवाब मिल जायेगा। ये संभव हो सका त्रिजटा के संग की वजह से। घोर राक्षस नगरी में भी सीता को हिम्मत ब...