हम अपने पिता का कहना नहीं मानते!
महात्मा गांधी का सपना था कि भारत में रामराज्य की स्थापना हो और उन्होंने ये सपना भारत के लोगों को भी दिखाया। १५ अगस्त १९४७ से लेकर अब तक भारत में गाहे-बगाहे राम राज्य की चर्चा किसी न किसी मंच से होती आई है। लेकिन अगर पॉलिटिकल पंडितों की मानें तो 'राम राज्य' एक यूटोपिया है, एक ऐसा काल्पनिक शब्द जिसका इस्तेमाल कर राजनीतिज्ञ आवाम को भ्रम में रखते हैं। फिर भी राम राज्य आज भी भारत की आवाम का सपना है। एक ऐसा सपना जो दिमाग में खिंची धर्म की दीवारों को तोड़ चुका है। राम मंदिर पर भले ही तलवारें खिंची हों, लेकिन राम राज्य भारत में आए इसपर सब सहमत हैं। पहले ये सपना गांधी ने दिखाया और फिर भाजपा ने। लेकिन ये सपना केवल मंच, माइक और रैलियों तक ही सिमटा रहा। इसको हकीकत में बदलने की कोशिश न महात्मा गांधी की कांग्रेस ने ही की और न भाजपा ने। भाजपा भले ही केंद्र में लंबे समय तक न रही हो, लेकिन कई राज्यों में वह लगातार कब्जा जमाए है और वहां भी राम राज्य की दिशा में कोई ठोस प्रयोग होता नहीं दिखता। शायद यही कारण है कि राम राज्य को यूटोपिया का दर्जा दिया गया। यहां संक्षेप में ये भी बताते चलें कि जिस र...