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Showing posts from September, 2026

“जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू…” — जब चाहत संकल्प बन जाती है

जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू।  सो तेहि मिलई न कछु संदेहू॥ गोस्वामी तुलसीदास जी की श्रीरामचरितमानस की यह चौपाई देखने में जितनी सरल है, अर्थ में उतनी ही गहरी। इसका सामान्य अर्थ है— जिसका जिस पर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे निश्चय ही प्राप्त करता है; इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन ‘सत्य सनेहू’ केवल प्रेम या भावनात्मक लगाव नहीं है। यही इस चौपाई की सबसे गहरी बात है। यहाँ ‘सत्य सनेह’ को यदि व्यापक अर्थ में देखें, तो यह उस सच्ची, निष्ठापूर्ण और पूर्ण समर्पित चाहत का प्रतीक है, जिसमें मनुष्य किसी लक्ष्य को केवल चाहता नहीं, बल्कि उसके लिए स्वयं को पूरी तरह लगा देता है। हम अक्सर जीवन में चाहते बहुत कुछ हैं—लेकिन क्या हम उसे पूरी सच्चाई से चाहते हैं? यही प्रश्न इस चौपाई को आज के जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक बना देता है। चाहत और सच्ची चाहत में अंतर हम कहते हैं— “मुझे यह नौकरी चाहिए।” “मुझे आगे बढ़ना है।” “मुझे स्वस्थ होना है।” “मुझे अपना व्यवसाय बढ़ाना है।” “मुझे परीक्षा में सफल होना है।” “मुझे अपने रिश्ते को बेहतर बनाना है।” लेकिन केवल इच्छा कर लेना पर्याप्त नहीं है। हम चाहते हैं...

सुमति और कुमति: जीवन की दिशा तय करने वाली शक्ति

“जहाँ सुमति तहँ संपति नाना। जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥” गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस की यह चौपाई जीवन के एक अत्यंत गहरे सत्य को बहुत सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसका अर्थ है— जहाँ अच्छी बुद्धि, विवेक और सद्विचार होते हैं, वहाँ अनेक प्रकार की संपत्ति आती है; और जहाँ दुर्बुद्धि, अविवेक तथा गलत विचार होते हैं, वहाँ विपत्ति का मूल उत्पन्न होता है। यहाँ ‘सुमति’ और ‘कुमति’ केवल अच्छी और बुरी सोच के सामान्य अर्थों तक सीमित नहीं हैं। ये मनुष्य के विचार, विवेक, निर्णय, दृष्टिकोण और आचरण की दिशा को दर्शाते हैं। परिस्थितियाँ हमारे जीवन को प्रभावित करती हैं, लेकिन उन परिस्थितियों में हम क्या सोचते हैं और कैसे निर्णय लेते हैं, वही आगे की दिशा तय करता है। सुमति क्या है? सुमति का अर्थ है—सद्बुद्धि, विवेकपूर्ण विचार, सही-गलत की पहचान, दूरदर्शिता और कल्याणकारी निर्णय लेने की क्षमता। सुमति वाला व्यक्ति केवल यह नहीं सोचता कि “मुझे अभी क्या मिलेगा?” बल्कि यह भी विचार करता है कि “मेरे निर्णय का आगे क्या परिणाम होगा और इसका प्रभाव मुझ पर तथा दूसरों पर क्या पड़ेगा?” सुमति में वि...